बारिश में इस तरह भीगें.......


क्या आपने कभी पहली बारिश का पूरा का पूरा अहसास किया है? पैड़-पौधों और पशु-पक्षियों की उमंग और उल्लास को महसूस किया है? किया होता तो निश्चिम मानिये आपने बड़ा कीमती तजुर्बा हांसिल कर लिया होता।



बारिश के रूप में भगवान की हम सभी पर करुणा ही तो बरसती है। हमारी परंपरा में परमात्मा को समस्त जीव और प्रकृति में व्याप्त माना गया है। प्रकृति को हम पहाड़, झरने, नदी, जंगल आदि के रूप में देखते हैं। 

आषाढ़ के साथ जब बारिश की पहली बूंदें जमीन पर गिरती हैं और प्रकृति में नवजीवन का संचार होता है। यह दृश्य हमारे मन को शांति और आनंद से भर देते हैं। हमारा मन नाच उठता है और आंखें प्रकृति के सम्मोहनकारी दृश्य का पान करने लगती हैं। 

हृदय में कई तरह की भावनाएं उमडऩे लगती हैं। हम प्रकृति के रूप-रंग में खो जाते हैं। प्रकृति का ही एक आनंदमय रूप है- वर्षा। वर्षा का मौसम हमें त्याग और सेवा की प्रेरणा देता है। बादल अपना सर्वस्व न्यौछावर कर अपने अस्तित्व को मिटाकर हमें जीवन देते हैं। उनका त्याग और सेवा-भाव हमारा जीवन है। 

हमें भी जीवन में त्याग और सेवा की इस भावना को अपनाना चाहिए। प्रकृति अपना सब कुछ न्यौछावर कर हमारा जीवन बनाती है।